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    कहीं पत्थर मारकर तो कहीं सिर काटकर... जानें दुनियाभर में कैसे दी जाती है मौत की सजा

     बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौत की साजिश रचने वाले 14 इस्लामी आतंकियों को मौत की सजा सुनाई गई है। इन आतंकवादियों ने 21 जुलाई 2000 को दक्षिण-पश्चिम गोपालगंज के कोटलीपाड़ा में चुनावी रैली के दौरान 76 किलोग्राम का बम लगाया था। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि इन आतंकवादियों को मौत की सजा फायरिंग स्क्वाड के जरिए दी जाएगी, ताकि अपराधियों की बीच कानून का डर पैदा हो। बांग्लादेश में मौत की सजा पाए अपराधियों को फांसी भी दी जाती है। भारत में भी लंबे समय से फांसी की सजा के खिलाफ मांग उठती रही है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में कहा गया था कि फांसी बेहद तकलीफदेह और दर्द देने वाला और लंबा तरीका' है और इसकी जगह थोड़े समय में मौत की सजा देने के तरीके अपनाए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया था कि फांसी की सजा देने के 40 मिनट बाद मौत की पुष्टि की जाती है। इससे कई आसान तरीके दुनियाभर में प्रयोग किए जा रहे हैं, जिनमें 5 से 7 मिनट में मौत की पुष्टि हो जाती है। भारत ही नहीं, दुनियाभर के कई देशों में फांसी की सजा के खिलाफ काफी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि दुनिया में मौत की सजा को कैसे अंजाम दिया जाता है...

    दुनियाभर के देशों में मौत देने का तरीका भी अलग-अलग

    दुनियाभर के देशों में मौत की सजा को अंजाम देने का तरीका अलग-अलग है। दुनिया के 58 देश मौत की सजा के लिए फांसी का तरीका अपनाते हैं। जबकि, 73 से अधिक देश मौत की सजा पाए दोषियों को गोली मारी जाती है। इन 73 देशों में से 45 देश अपराधियों को फायरिंग स्क्वाड के सामने खड़ा कर सजा की तामील करते हैं। भारत समेत दुनिया के 33 देशों में मौत की सजा देने के लिए एकमात्र तरीका फांसी हैं। इन देशों में मौत की सजा पाए दोषी को केवल फांसी के जरिए ही मारा जा सकता है। दुनिया में छह देश ऐसे हैं जहां पत्थर मारकर मौत की सजा दी जाती है। ये सभी कट्टर इस्लामिक देश हैं। पांच देश ऐसे हैं जहां मौत की सजा के लिए जहरीला इंजेक्शन दिया जाता है। इन सबके अलावा दुनिया के तीन देशों में मौत की सजा के लिए दोषी के सिर को काट दिया जाता है। दुनिया में 97 देश ऐसे हैं जिन्होंने मौत की सजा को खत्म कर दिया है। इन देशों में किसी भी अपराध के दोषी को मौत की सजा नहीं दी जाती है।

    भारत में मौत की सजा की तामील के लिए फांसी ही क्‍यों?

    दरअसल, अंग्रेजों के जमाने में बने कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर (CrPC, 1898) में मौत की सजा देने के लिए फांसी का प्रावधान था। इसी तरीके को CrPC 1973 में भी अपनाया गया। इसका सेक्‍शन 354(5) कहता है, 'जब किसी व्‍यक्ति को मौत की सजा सुनाई जाएगी तो उसे तब तक गर्दन से लटकाया जाएगा जब तक उसकी मौत न हो जाए।' आर्मी एक्‍ट, नेवी एक्‍ट और एयरफोर्स एक्‍ट में फांसी के अलावा गोली मारने का भी विकल्‍प है। फांसी के लिए अब 'लॉन्‍ग ड्रॉप' मेथड का इस्‍तेमाल होता है। इसे 1872 में ब्रिटेन के विलियम मारवुड ने ईजाद किया था। इसमें दोषी को फंदे से इस तरह लटकाया जाता है कि उसकी गर्दन टूट जाए और फिर उन्‍हें तब तक लटकाए रखा जाता है जब तक उनका दम न निकल जाए। स्‍वतंत्र भारत में सबसे पहले महात्‍मा गांधी के हत्‍यारे नाथूराम गोडसे और नारायण आप्‍टे को फांसी दी गई थी।

    कहीं सिर काटकर तो कहीं गोली मारकर दी जाती है मौत

    सऊदी अरब सहित दुनिया में तीन देश ऐसे हैं जहां सिर कलम कर मौत की सजा दी जाती है। यहां एक तलवार से अपराधी का सिर धड़ से अलग कर दिया जाता है। इसे देखने के लिए अच्‍छी-खासी भीड़ जुटती है। इस्लामी शरिया कानून में सिर काटकर सजा देने का प्रावधान है। ऐसी सजाएं अधिकतर जघन्य अपराधों के लिए दी जाती हैं। अप्रैल 2019 में सऊदी अरब ने एक दिन में 37 लोगों की सिर काटकर मौत की सजा दी थी। सऊदी अरब में राजनीतिक असंतोष और इससे जुड़ी गतिविधियों के अलावा आतंकवाद के दोषियों के लिए ऐसी सजा मुकर्रर है। इन देशों में तलवार से सिर काटकर सजा देने का फैसला इस्लामी कोर्ट करती है। जिसके बाद धार्मिक पुलिस सार्वजनिक रूप से दोषियों के सिर को काटकर सजा की तामील करती है। इनके अलावा इंडोनेशिया, चीन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान, थाइलैंड, बहरीन, उत्तर कोरिया, ताइवान, यमन, अमेरिका, चिली, घाना, बांग्लादेश, केमरून, आर्मीनिया सीरिया, युगांडा, कुवैत, ईरान, मिस्र में मौत की सजा पाए दोषियों को गोली मारकर मौत दी जाती है।

    कई देशों में जहरीले इंजेक्शन और करंट का होता है प्रयोग

    अमेरिका समेत दुनियाभर के कई देशों में घातक जहर देकर मौत की सजा दी जाती है। इसमें अपराधी को जहर से भरा एक इंजेक्‍शन लगाया जाता है। साल 2013 में चीन और वियतनाम में भी इसका इस्‍तेमाल हुआ। इसके अलावा इन देशों में बिजली के हाई वोल्टेज का झटका देकर भी लोगों को मारा जाता है। अमेरिका में इस तरीके को लेकर खासा बवाल हो चुका है। वहां 2013 में भी एक शख्‍स को इलेक्ट्रिक चेयर पर बिठाकर मौत दी गई थी। इसके अलावा अमेरिका में फांसी और फायरिंग के जरिए भी मौत की सजा दी जाती है।
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